THE POWER AND DIGNITY OF WOMEN

THE POWER AND DIGNITY OF WOMEN

ये कैसी रीति चली आई है(महिला शक्ति और सम्मान )

ये कैसी रीति चली आयी है
ये कैसी रीति चली आयी है !
विभाजन के हथियार से लड़ा आपस में भाई-भाई है
ये कैसी रीति चली आयी है,
ये कैसी रीति चली आयी है!

विभाजन माँ की ममता का, 
विभाजन पिता के दुलार का ,
खेलकर बड़े हुये हैं जिसमें,
विभाजन उस घर आंगन का
माता-पिता के सपनों को रोंदता,
जो खुद उनकी परछायी है!

ये कैसी रीति चली आयी है
ये कैसी रीति चली आयी है

देकर जन्म उस कपूत को,
वह माँ भी अवश्य पछतायी है,
सूखे में सुलाकर जिसको वो,
खुद चैन से ना सो पायी है,
इन भूखे प्यासे नेत्रों ने,
ये कैसी आह सुनाई है,

ये कैसी रीति चली आयी है!
ये कैसी रीति चली आयी है!

स्त्री का हनन करने की,
जो शक्ति मानव ने पायी है,
इस कलयुगी राक्षस के सामने,
रावण भी धाराशायी है ,
नैतिकता से दुराचार करके भी,
ना लज्जा इसको आई है !

ये कैसी रीति चली आयी है!
ये कैसी रीति चली आयी है!

जिसने ओढ़ पिया की चुनरी,
मयके से ली विदाई है ,
सपनों की नाव में चढ़कर जो,
खुद मृत्यू द्वार पर आई है
दहेज लालसा की त्रस्ना ने,
उसकी मौत से प्यास बुझाई है!

ये कैसी रीति चली आयी है!
ये कैसी रीति चली आयी है!

मैं कहता हूँ! तोड़ दो उस परम्परा को,
जो वर्षों से चलती आयी है ,
ये कोई नारी का हक नहीं,
जिसको वो निभाती आयी है,
दो उसको वो पहचान ,
जिसकी वो हकदाई है,
क्यूंकी नारी ही वही रूप है,
जिसमें समस्त देवियां समायी हैं!

*कवि :- नफीस अहमद*

 

मेरी (नफीस अहमद) ओर से महिला शक्ति और सम्मान में सुधार के लिए शब्दों का संघर्ष……कृपया मेरे ये शब्द हर किसी तक पहुँचाए….. जय माँ, जय हिन्द, वंदे मातरम् 

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